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चाणक्य नीति

संस्कारहीन परिवार की संस्कारी लड़की से शादी कर लेना चाहिए...

 रात-दिन कई लोगों से हमारा संपर्क होता है, उनमें से कुछ अच्छे चरित्र और व्यवहार वाले होते हैं तो कुछ बुरे स्वभाव वाले होते हैं। अच्छे लोगों से सीखने और लेने के लिए काफी कुछ रहता है लेकिन हम बुरे लोगों से भी अच्छी बातें ग्रहण कर सकते हैं। इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने कहा है कि-

विषादप्यमृतं ग्राह्ममेध्यादपि कांचनम्।

नीचादप्युत्तमां विद्यां स्त्रीरत्नं दुष्कुलादपि।।

चाणक्य नीति


स्त्रियों की खास विशेषताएं क्या-क्या हैं, जानिए

 

 स्त्रियों के संबंध में ऐसा माना जाता है कि उन्हें कोई नहीं समझ सकता। इसी वजह से स्त्रियों को जानने और समझने की जिज्ञासा सभी को रहती है। स्त्रियों के स्वभाव के संबंध में आचार्य चाणक्य ने लिखा है कि-

अनृतं साहसं माया मूर्खत्वमतिलोभिता।

अशौचत्वं निर्दयत्वं स्त्रीणां दोषा: स्वभावजा:।।

इस संस्कृत श्लोक में आचार्य चाणक्य ने लिखा है कि सामान्यत: अधिकांश स्त्रियां झूठ बोलती हैं, एकदम से कोई कार्य कर देती हैं, नखरे दिखाती हैं, नादान स्वभाव होता है, ज्यादा लालच करती हैं। ये कुछ लक्षण है जो सभी स्त्रियों में नहीं लेकिन अधिकांश स्त्रियों पाए जाते हैं।

आज समय के साथ अधिकांश महिलाएं भी शिक्षित हो रही हैं अत: इस प्रकार के दोष शिक्षित स्त्रियों में कम ही देखने को मिलते हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सामान्यत: अधिकांश स्त्रियां छोटी-छोटी बातों पर भी झूठ बोलती हैं। कुछ स्त्रियां अचानक से कोई कार्य कर देती हैं। कई बार नादानी में बड़ी समस्याएं खड़ी कर लेती हैं। काफी स्त्रियां नखरे भी बहुत दिखाती हैं वहीं कुछ महिलाएं धन के प्रति पुरुषों से अधिक लालची होती हैं

Chanakya Niti


जानिए किसी भी स्त्री की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

 

 स्त्री हो या पुरुष, सभी के पास कुछ गुण, कुछ शक्तियां होती हैं जिनसे वे अपने कार्य सिद्ध कर सकते हैं। वैसे तो हर व्यक्ति की अलग-अलग शक्तियां होती हैं लेकिन आचार्य चाणक्य ने बताया है कि किसी भी स्त्री की शक्ति उसकी सुंदरता, यौवन और मीठी वाणी होती है। चाणक्य कहते हैं-

बाहुवीर्यबलं राज्ञो ब्राह्मणो ब्रह्मविद् बली।

रूप-यौवन-माधुर्यं स्त्रीणां बलमनुत्तमम्।।

किसी भी राजा की शक्ति उसका स्वयं का बाहुबल है। ब्राह्मणों की ताकत उनका ज्ञान होता है। स्त्रियों की ताकत उनका सौंदर्य, यौवन और उनकी मीठी वाणी होती है।

आचार्य कहते हैं कि वैसे तो किसी भी राजा के अधीन उसकी सेना, मंत्री और अन्य राजा रहते हैं लेकिन उसका स्वयं का ताकतवर होना भी जरूरी है। यदि कोई राजा स्वयं शक्तिहीन है तो वह किसी पर राज नहीं कर सकता। राजा जितना शक्तिशाली होगा उतना ही अच्छा शासक रहता है। इसीलिए यह जरूरी है कि राजा का बाहुबल से भी शक्तिशाली हो।

किसी भी ब्राह्मण की शक्ति उसका ज्ञान है। ब्राह्मण जितना ज्ञानी होगा वह उतना ही अधिक सम्मान प्राप्त करेगा। ईश्वर और जीवन से संबंधित ज्ञान ही किसी भी ब्राह्मण की सबसे बड़ी शक्ति हो सकता है।

आचार्य चाणक्य कहते हैं किसी भी स्त्री का सौंदर्य और यौवन ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति होती है। यदि कोई स्त्री सुंदर नहीं है लेकिन मधुर व्यवहार वाली है तब भी वह जीवन में कभी भी परेशानियों का सामना नहीं करती है। मधुर व्यवहार से ही स्त्री मान-सम्मान प्राप्त करती हैं।

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सुख और दुख यह जीवन की अवस्थाएं बताई गई हैं। सभी लोगों के जीवन में सुख और दुख आते-जाते रहते हैं। कोई नहीं चाहता कि उनके जीवन में कभी दुख आए या गरीबी से कभी भी उनका सामना हो। इस संबंध में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि-

दरिद नाशन दान, शील दुर्गतिहिं नाशियत।

बुद्धि नाश अज्ञान, भय नाशत है भावना।।

दान से दरिद्रता या गरीबी का नाश होता है। शील या व्यवहार दुखों को दूर करता है। बुद्धि अज्ञानता को नष्ट कर देती है। हमारे विचार सभी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाते हैं।

आचार्य चाणक्य के अनुसार यदि कोई इंसान उसकी कमाई से कुछ हिस्सा दान करता रहे तो उसे कभी भी गरीबी का सामना नहीं करना पड़ेगा। व्यक्ति जो भी कमाता है, जो भी धन प्राप्त करता है उसमें कुछ भाग हमेशा ही जरूरतमंद लोगों की मदद में लगाना चाहिए, धार्मिक कार्य करना चाहिए। ऐसा करने पर हमारे पुण्य कर्मों की वृद्धि होती है जिससे महालक्ष्मी की कृपा सदैव हम पर बनी रहती है। इंसान के जीवन में काफी दुखों के कारण से उसके बुरे स्वभाव से संबंधित ही होते हैं। अत: अच्छे गुण और नम्र व्यवहार रखने से सभी लोगों से सुख प्राप्त होता है और दुख या कष्ट हमसे दूर ही रहते हैं। जो लोग नियमित रूप से भगवान की भक्ति में लगे रहते हैं, धर्म ग्रंथ पढ़ते हैं, उनसे ज्ञान प्राप्त करते हैं वे ज्ञानी हो जाते हैं। उन लोगों की अज्ञानता नष्ट हो जाती है। साथ ही इन कार्यों से हमारे विचार भी शुद्ध होते हैं और जीवन-मृत्यु, सुख-दुख के सभी भय दूर हो जाते हैं।
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